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BHAKTI KI SHAKTI
🕉️ सनातन वैदिक एवं पौराणिक अष्टक महाकोश

दिव्य अष्टकम् संग्रह

सनातन धर्म के संपूर्ण 24 प्रसिद्ध अष्टक स्तोत्र — श्री महालक्ष्मी, कालभैरव, रुद्राष्टकम्, मधुराष्टकम्, सूर्य, शनि, जगन्नाथ, भवानी, सरस्वती, संकटमोचन हनुमानाष्टक व गंगाष्टकम्। शुद्ध संस्कृत श्लोक, सरल हिंदी भावार्थ, पाठ विधि व ग्रह शांति फलश्रुति सहित।

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📖 अष्टकम् तत्त्व, रहस्य एवं साधना मार्गदर्शिका

अष्टक क्या है? उत्पत्ति, छंद संरचना, ग्रह शांति व प्रामाणिक साधना

🕉️ 'अष्टक' शब्द की व्युत्पत्ति एवं परिभाषा

संस्कृत व्याकरण के अनुसार 'अष्टकम्' शब्द की रचना 'अष्टन्' (जिसका अर्थ संख्या आठ होता है) से हुई है। वैदिक व पौराणिक स्तोत्र साहित्य में किसी आराध्य देव, पराशक्ति अथवा दार्शनिक भाव की वन्दना में रचे गए आठ विशिष्ट श्लोकों (छंदों) के समूह को अष्टकम् कहा जाता है।

अष्टक की एक प्रमुख विशेषता यह है कि अधिकांश स्तोत्रों में आठ मूल पदों के उपरांत एक ९वाँ श्लोक 'फलश्रुति' के रूप में जोड़ा जाता है। यह फलश्रुति साधक को उस स्तुति के नित्य पाठ से प्राप्त होने वाले आधिदैविक, आधिभौतिक और आध्यात्मिक फलों का शास्त्रीय प्रमाण प्रस्तुत करती है।

🎼 छंद-शास्त्र एवं ३२ पंक्तियों की काव्यात्मक संरचना

पारंपरिक अष्टक सामान्यतः चतुष्पदी (Quatrains - चार-चार पंक्तियों के छंद) के रूप में निबद्ध होते हैं। इस प्रकार आठ श्लोकों में कुल ३२ पंक्तियां बनती हैं। यह संख्या मात्र काव्यात्मक नहीं, बल्कि वैदिक वाक्-शक्ति के ३२ अक्षरों के अनुष्टुप छंद और मानव शरीर की ३२ नाड़ियों की शुद्धि से भी संबंधित मानी जाती है।

अष्टकों में भुजङ्गप्रयात (सर्प की चाल जैसी लय), शिखरिणी (गंभीर व उदात्त भाव), तोटक (द्रुत व चंचल माधुर्य), स्रग्धरा व अनुष्टुप छंदों का सुंदर प्रयोग होता है, जो पाठ करते समय मन में विशेष सकारात्मक तरंगें (Vibrations) उत्पन्न करते हैं।

🔱 देवता एवं परंपरा अनुसार फ़िल्टर:
प्रदर्शित अष्टक: 63 / 63
🔱 महालक्ष्मी 11 श्लोक
रचयिता: देवराज इन्द्र (पद्म पुराण)
छन्द: अनुष्टुप छन्द

देवराज इन्द्र द्वारा रचित यह अष्टक धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य और दरिद्रता निवारण हेतु सनातन परंपरा का सर्वाधिक सिद्ध और फलदायी स्तोत्र है।

शुक्रवार, पूर्णिमा, दीपावली पाठ करें →
🔱 कालभैरव 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: स्रग्धरा / भुजङ्गप्रयात छन्द

आदि शंकराचार्य द्वारा काशी में रचित यह अष्टक काल, मृत्यु, भय, नकारात्मक शक्तियों और पापों का संहार करने वाला परम शक्तिशाली स्तोत्र है।

रविवार, मंगलवार, कालाष्टमी पाठ करें →
🔱 भगवान शिव (रुद्र) 9 श्लोक
रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास (रामचरितमानस उत्तरकाण्ड)
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

गोस्वामी तुलसीदास कृत यह अद्वितीय स्तोत्र भगवान शिव की निर्गुण व सगुण महिमा का गायन करता है। इसके पाठ से शिवजी शीघ्र अति प्रसन्न होते हैं।

सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि, सावन पाठ करें →
🔱 श्रीकृष्ण 8 श्लोक
रचयिता: महाप्रभु वल्लभाचार्य
छन्द: तोडक छन्द

महाप्रभु वल्लभाचार्य द्वारा रचित यह अद्वितीय भक्ति काव्य भगवान श्रीकृष्ण के प्रत्येक अंग, लीला और चेष्टा के संपूर्ण माधुर्य (मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्) का निरूपण करता है।

बुधवार, जन्माष्टमी, एकादशी पाठ करें →
🔱 भगवान सूर्य देव 9 श्लोक
रचयिता: संब पुराण / शिव प्रोक्त
छन्द: अनुष्टुप छन्द

प्रत्यक्ष देव भगवान भास्कर की स्तुति का यह अष्टक आरोग्य, तेज, आत्मबल, नेत्र ज्योति और कुंडली में सूर्य दोष व पितृ दोष की शांति हेतु सिद्ध है।

रविवार, मकर संक्रांति, छठ पर्व पाठ करें →
🔱 सूर्य मण्डल 9 श्लोक
रचयिता: ऋषि परंपरा (भविष्य पुराण)
छन्द: अनुष्टुप छन्द

सूर्य के दिव्य तेजोमय मण्डल की वन्दना करने वाला यह अष्टक आत्म-साक्षात्कार, कुण्डलिनी जागरण और असाध्य व्याधि मुक्ति हेतु अद्वितीय है।

रविवार, सप्तमी तिथि पाठ करें →
🔱 सद्गुरु देव 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र सांसारिक वैभव, रूप, धन व विद्या की नश्वरता बताते हुए गुरु चरणों में पूर्ण समर्पण ("ततः किं ततः किं") को ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य सिद्ध करता है।

गुरुवार, गुरु पूर्णिमा पाठ करें →
🔱 भगवान जगन्नाथ (पुरी) 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: शिखरिणी छन्द

आदि शंकराचार्य द्वारा श्रीक्षेत्र पुरी धाम में रचित यह अष्टक भगवान जगन्नाथ की प्रत्यक्ष कृपा, नेत्र दृष्टि में प्रभु दर्शन और मोक्ष प्राप्ति की परम प्रार्थना ("जगन्नाथः स्वामी नयनपथगामी भवतु मे") है।

रथयात्रा, पूर्णिमा, गुरुवार पाठ करें →
🔱 भगवान अच्युत (श्रीविष्णु / कृष्ण) 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र "अच्युतं केशवं रामनारायणं" जैसे परम पावन नामों का संकीर्तन करते हुए साधक को समस्त भयों से मुक्त कर वैकुण्ठ पद प्रदान करता है।

गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा पाठ करें →
🔱 माता भवानी (दुर्गा) 8 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र अनन्य शरणागति का शिखर है। इसमें साधक संसार के सभी संबंधों को त्यागकर केवल मां भवानी को ही अपनी एकमात्र गति स्वीकार करता है ("गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि")।

शुक्रवार, अष्टमी, नवमी, नवरात्रि पाठ करें →
🔱 शिवलिंग (भगवान शिव) 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

शिवलिंग के दिव्य, अनादि और सर्वपापहारी स्वरूप का गुणगान करने वाला यह अष्टक शिवभक्तों द्वारा जलाभिषेक व रुद्राभिषेक के समय सर्वाधिक गाया जाने वाला स्तोत्र है।

सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि पाठ करें →
🔱 भगवान शिव व बिल्व पत्र 9 श्लोक
रचयिता: शिव पुराण
छन्द: अनुष्टुप छन्द

शिवलिंग पर त्रिनेत्र स्वरूप तीन पत्तियों वाले एक अखण्ड बेलपत्र को अर्पित करने का महात्म्य बताने वाला यह अष्टक तीन जन्मों के पापों का शमन करता है ("एकबिल्वं शिवार्पणम्")।

सोमवार, महाशिवरात्रि, सावन मास पाठ करें →
🔱 माँ सरस्वती 9 श्लोक
रचयिता: पद्म पुराण
छन्द: अनुष्टुप छन्द

विद्या, बुद्धि, स्मरण शक्ति और वाक-सिद्धि की अधिष्ठात्री भगवती शारदा की स्तुति का यह अष्टक विद्यार्थियों और ज्ञान साधकों के लिए वरदान स्वरूप है।

बसंत पंचमी, गुरुवार, बुधवार पाठ करें →
🔱 भगवान शनि देव 9 श्लोक
रचयिता: महाराज दशरथ (पद्म पुराण)
छन्द: अनुष्टुप छन्द

अयोध्या नरेश महाराज दशरथ द्वारा रचित यह अष्टक शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, महादशा और मारक दृष्टि के निवारण का अचूक और शास्त्रीय स्तोत्र है।

शनिवार, शनि जयंती, अमावस्या पाठ करें →
🔱 श्री हनुमान जी 9 श्लोक
रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास
छन्द: मत्तगयन्द सवैया छन्द

गोस्वामी तुलसीदास कृत यह अष्टक जीवन के असाध्य संकटों, रोगों और बाधाओं को हरने वाला जन-जन का सर्वाधिक प्रिय और सिद्ध हनुमत् स्तोत्र है ("को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो")।

मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती पाठ करें →
🔱 भगवान श्रीकृष्ण 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: अनुष्टुप छन्द

आदि शंकराचार्य कृत यह अष्टक "वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्... कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्" के जयघोष से भगवान श्रीकृष्ण को संपूर्ण जगत का गुरु मानकर वन्दना करता है।

बुधवार, जन्माष्टमी, एकादशी पाठ करें →
🔱 माता अन्नपूर्णा (काशी) 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: स्रग्धरा छन्द

काशी की स्वामिनी माता अन्नपूर्णा से अन्न, ज्ञान और वैराग्य की भिक्षा मांगने वाली आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होने देता ("भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी")।

शुक्रवार, अन्नपूर्णा जयंती, पूर्णिमा पाठ करें →
🔱 माँ गङ्गा 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: शिखरिणी छन्द

आदि शंकराचार्य द्वारा रचित यह अष्टक पतितपावनी मां गंगा की निर्मल जलधारा की महिमा गाते हुए जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति और मोक्ष प्रदान करता है।

गंगा दशहरा, पूर्णिमा, मकर संक्रांति पाठ करें →
🔱 भगवान श्री गणेश 9 श्लोक
रचयिता: गणेश पुराण
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

विघ्नहर्ता भगवान गणेश के निर्गुण-सगुण, ब्रह्माण्ड-व्यापक स्वरूप की स्तुति करने वाला यह अष्टक समस्त नए कार्यों, व्यापार और मांगलिक अनुष्ठानों की निर्विघ्न सिद्धि प्रदान करता है।

बुधवार, गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी पाठ करें →
🔱 भगवती तारा (द्वितीय महाविद्या) 9 श्लोक
रचयिता: तन्त्र शास्त्र (बृहन्नील तन्त्र)
छन्द: अनुष्टुप छन्द

दस महाविद्याओं में द्वितीय शक्ति मां तारा की स्तुति का यह अष्टक साधक को जीवन के भयानक संकटों, घोर दरिद्रता, वाक-जड़ता और भवसागर से तारने (उद्धार करने) वाला परम सिद्ध स्तोत्र है।

नवमी, अष्टमी, शुक्रवार, तारा रात्रि पाठ करें →
🔱 भगवान शिव 9 श्लोक
रचयिता: पद्म पुराण
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

सृष्टि के परम कारण, अनादि, सच्चिदानंद स्वरूप देवाधिदेव महादेव की स्तुति का यह अष्टक जीवन के समस्त क्लेशों और भवरोग का समूल निवारण करता है।

सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि पाठ करें →
🔱 भगवान दत्तात्रेय (गुरुदेव) 9 श्लोक
रचयिता: महर्षि परंपरा / पद्म पुराण
छन्द: अनुष्टुप छन्द

ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संयुक्त अवतार परम अवधूत भगवान दत्तात्रेय की स्तुति का यह अष्टक साधक को समस्त गुरु-दोषों, पितृ-दोषों और मानसिक विकारों से मुक्त कर आत्मज्ञान प्रदान करता है।

गुरुवार, दत्तात्रेय जयंती, पूर्णिमा पाठ करें →
🔱 श्री राधा रानी 9 श्लोक
रचयिता: रूप गोस्वामी / पद्म पुराण
छन्द: शिखरिणी छन्द

वृन्दावन की महारानी और भगवान श्रीकृष्ण की आल्हादिनी शक्ति श्रीराधारानी की स्तुति का यह अष्टक साधक के हृदय में विशुद्ध प्रेमभक्ति और युगल-चरणों की सेवा प्रदान करता है।

राधाष्टमी, पूर्णिमा, शुक्रवार पाठ करें →
🔱 भगवान चन्द्रशेखर (शिव) 9 श्लोक
रचयिता: ऋषि मार्कण्डेय
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

अल्पायु मार्कण्डेय ऋषि द्वारा मृत्यु के देवता यमराज से अपनी रक्षा हेतु रचा गया यह अष्टक मृत्यु, काल और असाध्य भय का संहार कर दीर्घायु और शिवलोक प्रदान करता है ("चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहि माम्")।

सोमवार, त्रयोदशी (प्रदोष), महाशिवरात्रि पाठ करें →
🔱 भगवती जगदम्बा (आदिशक्ति अम्बा) 9 श्लोक
रचयिता: आदि शंकराचार्य
छन्द: स्रग्धरा / तोटक छन्द

जगदम्बा अम्बा के इस अष्टक का नित्य पाठ जीवन से भय, दारिद्र्य और व्याधियों का नाश कर मातृकृपा और अक्षय ऐश्वर्य प्रदान करता है।

शुक्रवार, अष्टमी, नवमी, नवरात्रि पाठ करें →
🔱 भगवान अर्धनारीश्वर (शिव-शक्ति समन्वित रूप) 9 श्लोक
रचयिता: आदि शंकराचार्य
छन्द: अनुष्टुप एवं उपजाति छन्द

शिव और शक्ति के अद्वैत एकाकार रूप अर्धनारीश्वर का यह अष्टक दाम्पत्य जीवन में प्रेम, संतुलन, आरोग्य और अद्वैत ज्ञान की सिद्धि कराता है।

सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि पाठ करें →
🔱 मां महाकाली (कालिका) 9 श्लोक
रचयिता: आदि शंकराचार्य
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

मां कालिका का यह स्तोत्र अकाल मृत्यु, तंत्र बाधा, घोर शत्रु पीड़ा और आंतरिक अज्ञान का संहार कर अभय और मोक्ष प्रदान करता है।

शनिवार, मंगलवार, अष्टमी, अमावस्या, कालरात्रि पाठ करें →
🔱 भगवती दुर्गा (आपदुद्धारिणी) 9 श्लोक
रचयिता: महर्षि दुर्वासा / सिद्ध परम्परा
छन्द: भुजङ्गप्रयात एवं उपजाति छन्द

जीवन के घोर संकट, विपत्ति, अकाल, रोग, कारागार भय और आर्थिक तबाही से रक्षा करने वाला यह अष्टक साक्षात् संजीवनी के समान है।

मंगलवार, शुक्रवार, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी पाठ करें →
🔱 भगवती यमुना जी (कालिन्दी) 9 श्लोक
रचयिता: श्रीमद्वल्लभाचार्य जी महाप्रभु
छन्द: पृथ्वी छन्द

पुष्टिमार्ग का सर्वप्रमुख स्तोत्र, जिसका पाठ भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम, व्रज-रस, मानसिक निर्मलता और यमराज के भय से मुक्ति प्रदान करता है।

रविवार, यम द्वितीया (भाई दूज), एकादशी, पूर्णिमा पाठ करें →
🔱 मां नर्मदा (रेवा / मेकलसुता) 9 श्लोक
रचयिता: आदि शंकराचार्य
छन्द: स्रग्धरा / तोटक छन्द

दर्शन मात्र से पापनाशिनी मां नर्मदा का यह अष्टक समस्त पापों, कालदोषों और आधि-व्याधियों का निवारण कर शिवलोक की प्राप्ति कराता है।

नर्मदा जयंती (माघ शुक्ल सप्तमी), सोमवार, पूर्णिमा, अमावस्या पाठ करें →
🔱 काशी मणिकर्णिका तीर्थ (महाश्मशान / तारक ब्रह्म) 9 श्लोक
रचयिता: आदि शंकराचार्य
छन्द: शार्दूलविक्रीडित छन्द

काशी के परम मोक्षतीर्थ मणिकर्णिका की स्तुति, जिसका पाठ मृत्यु भय को मिटाकर साक्षात् तारक मन्त्र और शिव-सायुज्य मुक्ति का फल देता है।

सोमवार, मणिकर्णिका स्नान पर्व, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि पाठ करें →
🔱 भगवान काशी विश्वनाथ (महादेव) 9 श्लोक
रचयिता: महर्षि वेदव्यास
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख काशी के अधिपति भगवान विश्वनाथ का यह अष्टक जीवन से समस्त दारिद्र्य, रोग और संतापों का नाश कर परम पद देता है।

सोमवार, महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, प्रदोष पाठ करें →
🔱 भगवान विट्ठल पाण्डुरङ्ग (पंढरपुर) 9 श्लोक
रचयिता: आदि शंकराचार्य
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

भीमा नदी के तट पर ईंट पर खड़े भक्तवत्सल भगवान विट्ठल का यह अष्टक भवसागर से पार उतारने वाला और भगवद्-प्रेम प्रदान करने वाला है।

आषाढ़ी व कार्तिकी एकादशी, बुधवार, पूर्णिमा पाठ करें →
🔱 भगवती तुलसी महारानी (वृन्दा देवी) 9 श्लोक
रचयिता: महर्षि वेदव्यास / पद्म पुराण
छन्द: अनुष्टुप छन्द

तुलसी नामाष्टक का नित्य पाठ अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्यफल देता है और घर में सुख-समृद्धि, रोगमुक्ति तथा श्रीहरि की नित्य कृपा बनाए रखता है।

प्रतिदिन प्रातः, कार्तिक मास, एकादशी, तुलसी विवाह पाठ करें →
🔱 भगवान कार्तिकेय (स्कन्द / मुरुगन) 9 श्लोक
रचयिता: महर्षि अगस्त्य / स्कन्द पुराण
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

देवसेनापति भगवान कार्तिकेय का यह अष्टक मंगल ग्रह के क्रूर दोषों, शत्रु बाधा, भय और प्रतियोगिता में सफलता दिलाने वाला दिव्य स्तोत्र है।

मंगलवार, षष्ठी तिथि (स्कन्द षष्ठी), कृत्तिका नक्षत्र पाठ करें →
🔱 भगवती शीतला माता 9 श्लोक
रचयिता: महर्षि वेदव्यास / स्कन्द पुराण
छन्द: अनुष्टुप छन्द

चेचक, खसरा, ज्वर, त्वचा रोग, ताप और संक्रामक महामारियों से रक्षा करने वाला यह अष्टक बच्चों और पूरे परिवार को परम आरोग्य व शीतलता प्रदान करता है।

शीतला अष्टमी (बसोड़ा), मंगलवार, चैत्र कृष्ण अष्टमी पाठ करें →
🔱 भगवान श्रीकृष्ण (गोविन्द) 9 श्लोक
रचयिता: आदि शंकराचार्य
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

आदि शंकराचार्य विरचित यह अष्टक भगवान श्रीकृष्ण के परब्रह्म और लीला स्वरूप का गान करता है, जो समस्त पापों का हरण कर परमानन्द और मुक्ति देता है।

बुधवार, एकादशी, जन्माष्टमी, पूर्णिमा पाठ करें →
🔱 मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम 9 श्लोक
रचयिता: महर्षि व्यास / तुलसी परम्परा
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

भगवान श्रीराम के पावन गुणों, शील और ऐश्वर्य का गान करने वाला यह अष्टक विपत्तियों का नाश कर परम शांति, धर्म और रामकृपा प्रदान करता है।

मंगलवार, रविवार, रामनवमी, विवाह पंचमी पाठ करें →
🔱 भगवान श्री नन्दनन्दन (बालकृष्ण) 9 श्लोक
रचयिता: श्रीमद्वल्लभाचार्य जी महाप्रभु
छन्द: तोटक छन्द

नन्दनन्दन श्यामसुन्दर के नखशिख रूप-सौंदर्य और बाल-लीलाओं की यह स्तुति साधक के चित्त को परम माधुर्य और वात्सल्य रस से सराबोर कर देती है।

बुधवार, अष्टमी, जन्माष्टमी, पूर्णिमा पाठ करें →
🔱 भगवान श्री वेंकटेश्वर (बालाजी / श्रीनिवास) 9 श्लोक
रचयिता: ब्रह्माण्ड पुराण / तिरुमला परम्परा
छन्द: अनुष्टुप छन्द

कलियुग के प्रत्यक्ष वरदाता तिरुपति बालाजी का यह अष्टक घोर दरिद्रता, कर्ज और ग्रह पीड़ा का नाश कर अक्षय धन, ऐश्वर्य और वैकुण्ठ कृपा देता है।

शनिवार, एकादशी, ब्रह्मोत्सव, पूर्णिमा पाठ करें →
🔱 भगवान आदि वराह (भू-वराह रूप) 9 श्लोक
रचयिता: महर्षि शौनक / वराह पुराण
छन्द: अनुष्टुप छन्द

रसातल से पृथ्वी का उद्धार करने वाले भगवान वराह का यह अष्टक भूमि दोष, वास्तु दोष, कर्ज, मुकदमेबाजी और संपत्ति विवादों को समूल मिटाता है।

मंगलवार, वराह द्वादशी, एकादशी पाठ करें →
🔱 भगवती भुवनेश्वरी (चौथी महाविद्या) 9 श्लोक
रचयिता: रुद्रयामल तन्त्र
छन्द: अनुष्टुप छन्द

समस्त ब्रह्माण्ड की अधिष्ठात्री माता भुवनेश्वरी का यह अष्टक साधक को समस्त राजसी सुख, धन, ऐश्वर्य, सौंदर्य और जीवन में सर्वोच्च पद प्रदान करता है।

शुक्रवार, पूर्णिमा, नवरात्रि, अष्टमी पाठ करें →
🔱 भगवती धूमावती (सातवीं महाविद्या) 9 श्लोक
रचयिता: शाक्त तन्त्र परम्परा
छन्द: अनुष्टुप छन्द

सातवीं महाविद्या मां धूमावती का यह अष्टक साधक के जीवन से घोर दारिद्र्य, कर्ज, अज्ञात शत्रु, प्रेत बाधा और समस्त कलहों को भस्म कर परम वैराग्य देता है।

धूमावती जयंती (ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी), शनिवार, अमावस्या पाठ करें →
🔱 भगवती ललिता महात्रिपुरसुन्दरी (षोडशी) 9 श्लोक
रचयिता: आदि शंकराचार्य
छन्द: स्रग्धरा छन्द

श्रीचक्र की अधिष्ठात्री त्रिपुरसुन्दरी का यह अष्टक साधक को समस्त सौंदर्य, आकर्षण, राजयोग, वाक्सिद्धि और मोक्ष साम्राज्य प्रदान करता है।

शुक्रवार, पूर्णिमा, ललिता पंचमी, नवरात्रि पाठ करें →
🔱 भगवान पशुपतिनाथ (महादेव) 9 श्लोक
रचयिता: आदि शंकराचार्य / शिव पुराण
छन्द: तोटक छन्द

जीवों के पाश (अविद्या, राग-द्वेष और अज्ञान) को काटकर मोक्ष प्रदान करने वाले पशुपतिनाथ का यह अष्टक भयमुक्ति और शिव-सान्निध्य देता है।

सोमवार, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत पाठ करें →
🔱 भगवान वैद्यनाथ (देवघर ज्योतिर्लिंग) 9 श्लोक
रचयिता: आदि शंकराचार्य
छन्द: अनुष्टुप एवं उपजाति छन्द

समस्त आधि-व्याधियों, असाध्य रोगों और संसार रूपी भवरोग के परम वैद्य भगवान वैद्यनाथ का यह अष्टक पूर्ण आरोग्य, दीर्घायु और सुख प्रदान करता है।

सोमवार, त्रयोदशी (प्रदोष), महाशिवरात्रि, सावन मास पाठ करें →
🔱 परब्रह्म भगवान श्री नारायण 9 श्लोक
रचयिता: आदि शंकराचार्य / नारायणोपनिषद्
छन्द: अनुष्टुप छन्द

परम पुरुषोत्तम भगवान नारायण का यह अष्टक समस्त पापों का संहार कर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सिद्धि कराता है।

गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा, वैकुण्ठ चतुर्दशी पाठ करें →
🔱 भगवान श्री बिन्दुमाधव (काशी पञ्चगंगा) 9 श्लोक
रचयिता: महर्षि वेदव्यास / काशी खण्ड
छन्द: अनुष्टुप छन्द

काशी के प्रधान वैष्णव तीर्थ पञ्चगंगा घाट पर विराजमान भगवान बिन्दुमाधव का यह अष्टक कार्तिक स्नान और मुक्ति का साक्षात् फल प्रदान करता है।

कार्तिक मास, एकादशी, गुरुवार, देवदीपावली पाठ करें →
🔱 भगवान सदाशिव (कल्याणेश्वर) 9 श्लोक
रचयिता: आदि शंकराचार्य / शिव पुराण
छन्द: अनुष्टुप छन्द

भगवान शिव के परम मंगलकारी स्वरूप की यह स्तुति घर में विवाह, मांगलिक कार्य, सुख-सौभाग्य और अरिष्ट शांति प्रदान करती है।

सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि पाठ करें →
🔱 भगवान श्री गणेश (विघ्नहर्ता) 9 श्लोक
रचयिता: गणेश पुराण / महर्षि व्यास
छन्द: अनुष्टुप छन्द

सर्वप्रथम पूज्य विघ्नहर्ता भगवान गणेश का यह अष्टक हर नए कार्य, व्यापार, गृहप्रवेश और यात्रा में निर्विघ्न सिद्धि और मंगलकारी सफलता देता है।

बुधवार, गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी पाठ करें →
🔱 भगवान श्री गोपीजनवल्लभ श्रीकृष्ण 9 श्लोक
रचयिता: श्रीमद्वल्लभाचार्य जी महाप्रभु
छन्द: अनुष्टुप छन्द

कलियुग के घोर अधर्म, असहायता और समस्त साधनों के लुप्त होने पर एकमात्र श्रीकृष्ण के अनन्य आश्रय का उद्घोष करने वाला महामंत्र-तुल्य स्तोत्र।

प्रतिदिन, बुधवार, एकादशी, जन्माष्टमी पाठ करें →
🔱 युगल सरकार श्री राधा-कृष्ण 9 श्लोक
रचयिता: आदि शंकराचार्य / गौड़ीय परम्परा
छन्द: स्रग्धरा / भुजङ्गप्रयात छन्द

वृन्दावन के निकुंज में युगल सरकार के दिव्य रास, प्रेम और रूप-माधुर्य का यह अष्टक साधक के हृदय में विशुद्ध प्रेमाभक्ति और आनंद का संचार करता है।

राधाष्टमी, जन्माष्टमी, पूर्णिमा, शुक्रवार पाठ करें →
🔱 भगवान षोडशबाहु नृसिंह (सोलह भुजाओं वाले) 9 श्लोक
रचयिता: महर्षि व्यास / नृसिंह पुराण
छन्द: स्रग्धरा छन्द

सोलह दिव्य भुजाओं में आयुध धारण कर हिरण्यकशिपु का वध करने वाले भगवान नृसिंह का यह अष्टक घोर शत्रुओं, तांत्रिक अभिचार और असाध्य संकटों का तत्काल संहार करता है।

नृसिंह जयंती, मंगलवार, शनिवार, चतुर्दशी पाठ करें →
🔱 भगवती वाराही देवी (सप्तमातृका) 9 श्लोक
रचयिता: वाराही तन्त्र / शाक्त परम्परा
छन्द: अनुष्टुप छन्द

मां ललिता त्रिपुरसुन्दरी की प्रधान सेनापति (दण्डनाथा) वाराही देवी का यह अष्टक घोर शत्रुओं के स्तम्भन, षड्यंत्र नाश और अजेय सुरक्षा के लिए प्रसिद्ध है।

शुक्रवार, पंचमी, अष्टमी, शनिवार (रात्रि काल) पाठ करें →
🔱 भगवान श्री परशुराम (विष्णु के छठे अवतार) 9 श्लोक
रचयिता: महर्षि व्यास / ब्रह्माण्ड पुराण
छन्द: अनुष्टुप छन्द

अधर्म और अन्याय का दमन करने वाले चिरंजीवी भगवान परशुराम का यह अष्टक साधक को अदम्य साहस, शौर्य, बल, दीर्घायु और ब्रह्मतेज प्रदान करता है।

अक्षय तृतीया (परशुराम जयंती), मंगलवार, शुक्ल तृतीया पाठ करें →
🔱 संकटनाशन भगवान श्री गणेश 9 श्लोक
रचयिता: देवर्षि नारद / नारद पुराण
छन्द: अनुष्टुप छन्द

भगवान गणेश के द्वादश (12) नामों का यह सिद्ध स्तोत्र जीवन के घोर संकटों, कर्ज, व्यापार मंदी और असाध्य बाधाओं का 6 मास में निवारण करता है।

बुधवार, संकष्टी चतुर्थी, विनायक चतुर्थी पाठ करें →
🔱 भगवान श्रीहरि विष्णु (शरणागतवत्सल) 9 श्लोक
रचयिता: महर्षि व्यास / भागवत परम्परा
छन्द: अनुष्टुप छन्द

संसार के जन्म-मरण के भय, पापों और दीनता से मुक्ति पाने के लिए भगवान श्रीहरि के चरणों में पूर्ण शरणागति का यह पावन स्तोत्र अत्यंत प्रभावशाली है।

गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा, वैकुण्ठ चतुर्दशी पाठ करें →
🔱 श्री राधा कुण्ड (गोवर्धन व्रजधाम) 9 श्लोक
रचयिता: श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी
छन्द: मालिनी छन्द

गोवर्धन की तलहटी में स्थित समस्त ब्रह्माण्ड के सर्वश्रेष्ठ तीर्थ श्री राधाकुण्ड का यह अष्टक साधक को युगल सरकार की पराभक्ति प्रदान करता है।

राधाकुण्ड स्नान (अहोई अष्टमी), कार्तिक मास, पूर्णिमा पाठ करें →
🔱 भगवती हिंगुलाज माता (ब्रह्मरन्ध्र पीठ) 9 श्लोक
रचयिता: शाक्त परम्परा / तन्त्र महोदधि
छन्द: अनुष्टुप छन्द

माता सती के ब्रह्मरन्ध्र (सिर) गिरने से प्रादुर्भूत ५१ शक्तिपीठों में प्रथम हिंगुलाज भवानी का यह अष्टक भय, कुल-दोष और असाध्य संकटों का नाश करता है।

मंगलवार, शुक्रवार, नवरात्रि, अष्टमी पाठ करें →
🔱 परब्रह्म स्वरूप (आत्मज्ञान / जीवनमुक्ति) 9 श्लोक
रचयिता: आदि शंकराचार्य
छन्द: मालिनी छन्द

जगद्गुरु आदि शंकराचार्य विरचित यह अष्टक संसार में जीवनमुक्त, आत्मज्ञानी और परमानंद में लीन धन्य पुरुषों की स्थिति का अद्भुत निरूपण करता है।

गुरु पूर्णिमा, प्रतिदिन प्रातः, एकादशी पाठ करें →
🔱 माता गौरी के स्वामी भगवान शिव (गौरीश) 9 श्लोक
रचयिता: महर्षि व्यास / शिव पुराण
छन्द: अनुष्टुप छन्द

माता गौरी के प्रिय पति भगवान गौरीश की यह स्तुति साधक के समस्त पापों और दारिद्र्य का नाश कर अखण्ड सौभाग्य, दाम्पत्य प्रेम और शिवलोक देती है।

सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि पाठ करें →
🔱 युगल सरकार श्री सीता-राम जी 9 श्लोक
रचयिता: महर्षि वाल्मीकि / रामायण परम्परा
छन्द: अनुष्टुप छन्द

अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान युगल स्वरूप श्री सीताराम जी की यह स्तुति घर में मर्यादा, सुख-शांति, परस्पर प्रेम और रामराज्य प्रदान करती है।

रामनवमी, विवाह पंचमी, मंगलवार, रविवार पाठ करें →
🔱 भगवान महाकाल भैरव (उज्जैन / काशी) 9 श्लोक
रचयिता: आदि शंकराचार्य / भैरव तन्त्र
छन्द: अनुष्टुप छन्द

काल के भी काल भगवान महाकाल भैरव का यह अष्टक अकाल मृत्यु, शनि-राहु-केतु के क्रूर ग्रह दोष, तंत्र बाधा और शत्रु भय को तत्काल भस्म करता है।

कालाष्टमी, शनिवार, मंगलवार, मासिक शिवरात्रि पाठ करें →
FAQ

अष्टकम् से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी (FAQ)